श्री बटुकभैरव-अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्र बटुक भैरव अष्टोत्तर शतनाम के पाठ से बाधाओं और शत्रुओं पर विजय, स्वास्थ्य और मानसिक शांति मिलती है, धन और समृद्धि बढ़ती है, और आत्मविश्वास में वृद्धि होती है। यह स्तोत्र बुरी नजर, नकारात्मक ऊर्जा और अकाल मृत्यु से भी बचाता है। ॐ ह्रीं भैरवो भूतनाथश्च भूतात्मा भूतभावन:| क्षेत्रज्ञः क्षेत्रपालश्च क्षेत्रदः क्षत्रियो विराट् ||१|| श्मशानवासी मांसाशी खर्पराशी स्मरांतकः| रक्तपः पानपः सिद्धः सिद्धिदः सिद्धिसेवित ||२|| कंकालः कालशमनः कलाकाष्टातनु: कविः | त्रिनेत्रो बहुनेत्रश्च तथा पिंगल-लोचनः ||३|| शूलपाणिः खङ्गपाणिः कंकाली धूम्रलोचनः| अभीरू: भैरवीनाथो भूतपो योगिनीपतिः ||४|| धनदो अधनहारी च धनवान् प्रतिभानवान्| नागहारो नागपाशो व्योमकेशः कपालभृत् ||५|| कालः कपालमाली च कमनीयः कलानिधिः| त्रिलोचनो ज्वलन्नेत्रः त्रिशिखी च त्रिलोकप: ||६|| त्रिनेत्र तनयो डिम्भशान्तः शान्तजनप्रियः| बटुको बहुवेशश्च खट्वांगवरधारकः ||७|| भूताध्यक्षः पशुपतिः भिक्षुकः परिचारकः| धूर्तो दिगम्बरः शूरो हरिणः पांडुलोचनः ||८|| प्रशांतः शांतिदः शुद्धः शंकर-प्रियबांधवः| अष्टमूर्तिः नि...
दिपावली के शुभ उपलक्ष्य पर प्रसन्न करें माँ अष्टलक्ष्मी को उनके विशेष स्तोत्र द्वारा अष्ट लक्ष्मी रूप एवं स्तोत्र मंत्र माँ लक्ष्मी के 8 रूप माने जाते है।हर रूप विभिन्न कामनाओ को पूर्ण करने वाला है। दिवाली और हर शुक्रवार को माँ लक्ष्मी के इन सभी रूपों की वंदना करने से असीम सम्पदा और धन की प्राप्ति होती है। १) आदि लक्ष्मी या महालक्ष्मी : माँ लक्ष्मी का सबसे पहला अवतार जो ऋषि भृगु की बेटी के रूप में है। मंत्र सुमनसवन्दित सुन्दरि माधवी चन्द्र सहोदरीहेममये | मुनिगणमंडित मोक्षप्रदायिनी मंजुलभाषिणीवेदनुते || पंकजवासिनी देवसुपुजित सद्रुणवर्षिणी शांतियुते | जय जय हे मधुसुदन कामिनी आदिलक्ष्मी सदापलीमाम || २) धन लक्ष्मी : धन और वैभव से परिपूर्ण करने वाली लक्ष्मी का एक रूप भगवान विष्णु भी एक बारे देवता कुबेर से धन उधार लिया जो समय पर वो चूका नहीं सके , तब धन लक्ष्मी ने ही विष्णु जी को कर्ज मुक्त करवाया था। मंत्र धिमिधिमी धिंधिमी धिंधिमी धिंधिमी दुन्दुभी नाद सुपूर्णमये | घूमघूम घुंघुम घुंघुम घुंघुम शंखनिनाद सुवाद्यनुते || वेदपूराणेतिहास सुपूजित वैदिकमार्ग प्रदर्शयुते | जय जय...