❤️ योनी साधना❤️
आजकल बहुत से लोग हमें फोन या मैसेज करके एक ही सवाल पूछते हैं – अगर हम अपनी पत्नी की योनि की पूजा करेंगे तो क्या हमें बड़ा लाभ मिलेगा?
दोस्तों, यह सोच पूरी तरह गलत है और असली शक्ति साधना से बिल्कुल अलग है।
इस प्रश्न का कारण है लोगों को मिला अधूरा ज्ञान। आजकल लोग गूगल, युटुब, फेसबुक के माध्यम से जुड़े होने से कहीं भी गलत पोस्ट पढ़ लेते हैं, ऊपर से जो फेसबुक पर बड़े-बड़े महात्मा बैठे हैं, pdf बेचने वाले बैठे हैं यह सब ज्ञानी लोग भोले भाले लोगों के मन में ऐसी बातें डाल देते हैं जो कि बिल्कुल गलत है
असम का कामाख्या मंदिर एक महान शक्ति पीठ है। मान्यता है कि माता सती का योनि भाग वहीं विराजमान हुआ और इसी कारण यह शक्ति-पीठ विश्वप्रसिद्ध है। कामाख्या में होने वाली योनि पूजा किसी स्त्री शरीर की पूजा नहीं है, बल्कि आदिशक्ति के दिव्य स्वरूप की आराधना है। वहाँ की परंपरा शक्ति तत्त्व की साधना है, न कि किसी इंसान के शरीर की।
लेकिन आज कई लोग इस परंपरा को गलत ढंग से समझकर अपनी पत्नी या किसी अन्य स्त्री की योनि पूजा करना चाहते हैं। यह न तो शास्त्रसम्मत है, न धर्मसम्मत और न ही शक्ति साधना का मार्ग।
सच्चाई यह है कि कामाख्या की पूजा देवी के अनंत ऊर्जा-तत्त्व की साधना है, जबकि किसी सामान्य स्त्री की योनि पूजा केवल अज्ञान और भ्रम है। शक्ति साधना का उद्देश्य मन, बुद्धि और आत्मा को शुद्ध करना है। देवी की उपासना से दिव्य ऊर्जा और आशीर्वाद प्राप्त होते हैं। लेकिन अगर कोई साधक गलत दिशा में जाकर सामान्य स्त्री शरीर को शक्ति का प्रतीक मानकर पूजा करता है तो वह स्वयं भी भटक जाता है और साधना का अपमान भी करता है।
याद रखिए, शक्ति पीठ केवल दिव्य स्थलों पर हैं। किसी भी स्त्री की योनि पूजा करना आवश्यक नहीं है बल्कि अनुचित है। देवी की कृपा पाना है तो कामाख्या शक्ति-पीठ की परंपरा के अनुसार आराधना करें और माता के चरणों में भक्ति रखें।
सच्चा साधक वही है जो देवी के स्वरूप को सम्मान देता है और पूजा को शुद्ध भाव से करता है।
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