मां बगलामुखी स्तंभन की देवी है।सम्पूर्ण सृष्टि में जो भी तरंग है वो इन्हीं की वजह से है।सारे ब्रह्माण्ड की शक्ति मिल कर भी इनका मुकाबला नहीं कर सकती।शत्रुनाश, वाकसिद्धि, वाद विवाद,कोर्ट केस
में विजय के लिए इनकी उपासना की जाती है। इनकी उपासना से शत्रुओं का स्तम्भन होता है तथा जातक का जीवन निष्कंटक हो जाता है। किसी छोटे कार्य के लिए हो या असाध्य से लगाने वाले कार्य के लिए इनका मंत्र अनुष्ठान करना चाहिए। बगलामुखी मंत्र के जप से पूर्व बगलामुखी कवच का पाठ अवश्य करना चाहिए। भगवती का स्वरुप नवयौवना हैं और पीले रंग की साङी धारण करती हैं । सोने के सिंहासन पर विराजती हैं । तीन नेत्र और चार हाथ हैं । सिर पर सोने का मुकुट है । स्वर्ण आभूषणों से अलंकृत हैं । शरीर पतला और सुंदर है । रंग गोरा और स्वर्ण जैसी कांति है । सुमुखी हैं । मुख मंडल अत्यंत सुंदर है जिस पर मुस्कान छाई रहती है जो मन को मोह लेता है ।व्यष्ठि रूप में शत्रुओ को नष्ट करने की इच्छा रखने वाली तथा समिष्टि रूप में परमात्मा की संहार शक्ति ही बगला है। पिताम्बराविद्या के नाम विख्यात बगलामुखी की साधना प्रायः शत्रुभय से मुक्ति और वाकसिद्धि के लिये की जाती है। इनकी उपासना में हल्दी की माला, पीले फूल और पीले वस्त्रो का विधान है। माहविद्याओं में इनका स्थान आठवाँ है। बगलामुखी माता को तंत्र की देवी भी कहा जाता है, जो भी माँ बगलामुखी की शरण में जाते हैं माता उनकी सभी कामनाएं पूरी कर देती है। अगर किसी के जीवन में अभाव, कष्ट, दरिद्रा या अन्य कोई समस्या हो तो उनके मुक्ति पाने के लिए बगलामुखी माता के सिद्ध तांत्रिक मंत्रो का जप करने से सभी इच्छाएं पूरी होने लगती है।
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