Skip to main content

Posts

माता महाकाली सबर मंत्र

माता महाकाली सबर मंत्र (गोरखबाला कृपा) सतनाम आदेश गुरु जी को ॐ गुरु जी गोरखबाला सिमरु तेरा नाम गोरखबाला करो कृपा गोरखबाला करो स्वीकार मेरी पुकार तेरी भगति गुरु की शक्ति से चलाऊ महाकाली कलकत्ता वासनी ९ घाट विराट रूप धारणी महामाई कैलाश पर्वत से शिव आदेश से चली हाथ मैं खपड़ रक्त प्याली गले मैं मुंड माला पेहेन कर महामाई आई तू ही १० महाविद्या प्रथम स्थानी तेरा रूप निराला महामाई गोरख यती मछिन्दर का चेला हाँक मारे तुजे पुकारे मैं गोरख का चेला रक्षा करे मेरी मेरा नाथ तुम को पाऊ तुमको भाऊ ले के नाम गोरख का भैरव जननी महाकाली आओ मेरे पास महामाई न आवे तो गोरख का वचन तुझको सातवे गोरख बाणी तुजे खावे !!!! सतनाम आदेश गुरु गुरु गोरखनाथ जी अलख निरंजन !!!!!!

श्री काली जगन्मंगल कवचम्

(श्री काली जगन्मंगल कवचम्) ।।श्री दक्षिणाकाली प्रसन्नोस्तु।। . श्री काली जगन्मंगल कवचम् श्री भैरव्युवाच काली पूजा श्रुता नाथ भावाश्च विविधाः प्रभो । इदानीं श्रोतु मिच्छामि कवचं पूर्व सूचितम् ॥ त्वमेव शरणं नाथ त्राहि माम् दुःख संकटात् । सर्व दुःख प्रशमनं सर्व पाप प्रणाशनम् ॥ सर्व सिद्धि प्रदं पुण्यं कवचं परमाद्भुतम् । अतो वै श्रोतुमिच्छामि वद मे करुणानिधे ॥ भैरवउवाच रहस्यं श्रृणु वक्ष्यामि भैरवि प्राण वल्लभे । श्री जगन्मङ्गलं नाम कवचं मंत्र विग्रहम् ॥ पाठयित्वा धारयित्वा च त्रौलोक्यं मोहयेत्क्षणात् । नारायणोऽपि यद्धृत्वा नारी भूत्वा महेश्वरम् ॥ योगिनं क्षोभमनयत् यद्धृत्वा च रघूत्तमः। वर तृप्तो जघानैव रावणादि निशाचरान् ॥ यस्य प्रसादादीशोऽहं ्रैलोक्य विजयी प्रभुः । धनाधिपः कुबेरोऽपि सुरेशोऽभूच्छचीपतिः । एवं हि सकला देवाः सर्वसिद्धिश्वराः प्रिये ॥ विनियोग:- ॐ श्री जगन्मङ्गलस्यास्य कवचस्य ऋषिः शिवः । छ्न्दोऽनुष्टुप् देवता च कालिका दक्षिणेरिता ॥ जगतां मोहने दुष्ट विजये भुक्तिमुक्तिषु । योषिदाकर्षणे चैव विनियोगः प्रकीर्तितः ॥ ऋष्यादि-न्यास:- श्री शिव ऋषये नमःशि...

मा कालिका का अचूक मंत्र

 माता कालिका का यह अचूक मंत्र है। इससे माता जल्द से सुन लेती हैं, लेकिन आपको इसके लिए सावधान रहने की जरूरत है। आजमाने के लिए मंत्र का इस्तेमाल न करें। यदि आप काली के भक्त हैं तो ही करें।                                                                  (शाबर मंत्र  ) ॐ नमो काली कंकाली महाकाली मुख सुन्दर जिह्वा वाली, चार वीर भैरों चौरासी, चार बत्ती पूजूं पान ए मिठाई,अब बोलो काली की दुहाई। इस मंत्र का प्रतिदिन 108 बार जाप करने से आर्थिक लाभ मिलता है। इससे धन संबंधित परेशानी दूर हो जाती है। माता काली की कृपा से सब काम संभव हो जाते हैं। 15 दिन में एक बार किसी भी मंगलवार या शुक्रवार के दिन काली माता को मीठा पान व मिठाई का भोग लगाते रहें।

।।शास्त्रोक्त पूजा नियम ।।

1.संक्रांति, ग्रहण, षष्टी,अमावस्या और व्रत के दिन यथा सम्भव स्नान ठंडे पानी से ही करे,।नित्य ही करे ,यदि आप को माफिक आता है तो ये और भी उत्तम।(ठंडे इलाको वाले मौसम अनुरूप ही रहे) 2.दान ,जप और देवकर्म का अधिकारी स्नान पश्चात ही होता है। 3 दान सदैव वस्त्र पहनें होने पर ही करे। और दाहिने हाथ से करे। 4 प्रातःकाल के जप करने पर हाथ नाभि क्षेत्र के पास,दोपहर में हृदय क्षेत्र,सायंकाल मुख के समीप रखें। 5 तालाब में जप का एक गुना, गौशाला में सौ गुना,बगीचे या वन में हज़ार गुना,पवित्र तीर्थ में दस हज़ार गुना,नदी में एक लाख गुना,मंदिर में करोड़ गुना और ज्योतिर्लिंग स्थान में अनन्त गुना फल प्राप्त होता है।  मतांतर से घर मे एक गुना, नदी में दो,गौशाला में दस,सिद्ध क्षेत्रों में लाख,देव स्थानों में करोड़ और प्राचीन विष्णु मंदिरों में अनन्त गुना फल प्राप्त होता है।    मतांतर से ये नियम कुछ भिन्न भी हो सकते है,परन्तु मुझे ये उचित और व्यवहारिक लगते है।       ।।शुभ प्रभात।।

विशेष कृपा एवं महान विपरीत परिसथितयों में ही प्रयोग करें

विशेष कृपा एवं महान विपरीत परिसथितयों में ही प्रयोग करें जीवन में आ रही किसी भी प्रकार की समस्यायो के निदान के लिए प्रतिदिन 11 वार सस्वर पाठ करे ( दशमहाविद्यास्तोत्रम्: ) ॐ नमस्ते चण्डिके चण्डि चण्डमुण्डविनाशिनि । नमस्ते कालिके कालमहाभयविनाशिनि ॥१॥ शिवे रक्ष जगद्धात्रि प्रसीद हरवल्लभे । प्रणमामि जगद्धात्रीं जगत्पालनकारिणीम् ॥२॥ जगत् क्षोभकरीं विद्यां जगत्सृष्टिविधायिनीम् । करालां विकटां घोरां मुण्डमालाविभूषिताम् ॥३॥ हरार्चितां हराराध्यां नमामि हरवल्लभाम् । गौरीं गुरुप्रियां गौरवर्णालङ्कारभूषिताम् ॥४॥ हरिप्रियां महामायां नमामि ब्रह्मपूजिताम् । सिद्धां सिद्धेश्वरीं सिद्धविद्याधरङ्गणैर्युताम् ॥५॥ मन्त्रसिद्धिप्रदां योनिसिद्धिदां लिङ्गशोभिताम् । प्रणमामि महामायां दुर्गां दुर्गतिनाशिनीम् ॥६॥ उग्रामुग्रमयीमुग्रतारामुग्रगणैर्युताम् । नीलां नीलघनश्यामां नमामि नीलसुन्दरीम् ॥७॥ श्यामाङ्गीं श्यामघटितां श्यामवर्णविभूषिताम् । प्रणमामि जगद्धात्रीं गौरीं सर्वार्थसाधिनीम् ॥८॥ विश्वेश्वरीं महाघोरां विकटां घोरनादिनीम् । आद्यामाद्यगुरोराद्यामाद्यनाथप्रपूजिताम् ॥९॥ श्रीं दुर्गां धनदामन्नपूर्णां...