Skip to main content

मंदिर एवं मंदिर प्रांगण में दर्शन कैसे करें ?


मंदिर  अर्थात् जहां भगवानका साक्षात् वास है । दर्शनार्थी देवालयमें इस श्रद्धासे जाते हैं कि, वहां उनकी प्रार्थना भगवानके चरणोंमें अर्पित होती है और उन्हें मन:शांति अनुभव होती है ।
मंदिर में दर्शनकी योग्य पद्धति
मंदिर प्रवेशेसे पहले आवश्यक कृतियां
 शरीरपर धारण की हुई चर्मकी वस्तुएं उतार दें ।
 मंदिर के प्रांगणमें जूते-चप्पल पहनकर न जाएं; उन्हें देवालयक्षेत्रके बाहर ही उतारें ।      मंदिर  के प्रांगण अथवा देवालयके बाहर जूते-चप्पल उतारने ही पडें, तो देवताकी दाहिनी ओर उतारें ।
 मंदिर में व्यवस्था हो, तो पैर धो लें । हाथमें जल लेकर `अपवित्र: पवित्रो वा', ऐसा तीन बार बोलते हुए अपने संपूर्ण शरीरपर तीन बार जल छिडकें ।
किसी मंदिर में प्रवेश करनेसे पूर्व पुरुषोंद्वारा अंगरखा (शर्ट) उतारकर रखनेकी पद्धति हो, तो उस पद्धतिका पालन करें । (यद्यपि यह व्यावहारिक रूपसे उचित न लगे, तब भी  मंदिर की सात्त्विकता बनाए रखने हेतु कुछ स्थानोंपर ऐसी पद्धति है ।)
मंदिर में दर्शन हेतु जाते समय पुरुष भक्तजनोंको टोपी तथा स्त्रीभक्तोंको पल्लूसे अपने सिरको ढकना चाहिए ।
 मंदिर के प्रवेशद्वार व गरुडध्वजको नमस्कार करें । प्रांगणसे देवालयके कलशका दर्शन करें एवं कलशको नमस्कार करें ।
मंदिर प्रांगणसे सभामंडपकी ओर जाना
प्रांगण से सभामंडपकी ओर जाते समय हाथ नमस्कारकी मुद्रामें हों । (दोनों हाथ अनाहतचक्रके स्थानपर जुडे हुए व शरीरसे कुछ अंतरपर हों ।) भाव ऐसा हो कि, `अपने परमश्रद्धेय श्री गुरुदेव या आराध्य देवतासे प्रत्यक्ष भेंट करने जा रहे हैं' ।
२.३ देवालयकी सीढियां चढना
देवालयकी सीढियां चढते समय दाहिने हाथकी उंगलियोंसे सीढीको स्पर्श कर हाथ अपने आज्ञाचक्रपर रखें ।
 सभामंडपमें प्रवेश करना
 सभामंडपमें प्रवेश करनेसे पूर्व सर्वप्रथम सभामंडपके द्वारको दूरसे नमस्कार करें ।
 सभामंडपकी सीढियां चढते समय दाहिने हाथकी उंगलियोंसे सीढीको स्पर्श कर हाथ आज्ञाचक्रपर रखें ।
सभामंडपमें पदार्पण करते समय प्रार्थना करें, `हे प्रभु, आपकी मूर्तिसे प्रक्षेपित चैतन्यका मुझे अधिकाधिक लाभ होने दें' ।
सभामंडपसे गर्भगृहकी ओर जानेकी पद्धति सभामंडपकी बाईं ओरसे चलते हुए गर्भगृहतक जाएं ।
(देवताके दर्शनके उपरांत लौटते समय सभामंडपकी दाहिनी ओरसे आएं ।)  

Comments

Popular posts from this blog

श्री काली जगन्मंगल कवचम्

(श्री काली जगन्मंगल कवचम्) ।।श्री दक्षिणाकाली प्रसन्नोस्तु।। . श्री काली जगन्मंगल कवचम् श्री भैरव्युवाच काली पूजा श्रुता नाथ भावाश्च विविधाः प्रभो । इदानीं श्रोतु मिच्छामि कवचं पूर्व सूचितम् ॥ त्वमेव शरणं नाथ त्राहि माम् दुःख संकटात् । सर्व दुःख प्रशमनं सर्व पाप प्रणाशनम् ॥ सर्व सिद्धि प्रदं पुण्यं कवचं परमाद्भुतम् । अतो वै श्रोतुमिच्छामि वद मे करुणानिधे ॥ भैरवउवाच रहस्यं श्रृणु वक्ष्यामि भैरवि प्राण वल्लभे । श्री जगन्मङ्गलं नाम कवचं मंत्र विग्रहम् ॥ पाठयित्वा धारयित्वा च त्रौलोक्यं मोहयेत्क्षणात् । नारायणोऽपि यद्धृत्वा नारी भूत्वा महेश्वरम् ॥ योगिनं क्षोभमनयत् यद्धृत्वा च रघूत्तमः। वर तृप्तो जघानैव रावणादि निशाचरान् ॥ यस्य प्रसादादीशोऽहं ्रैलोक्य विजयी प्रभुः । धनाधिपः कुबेरोऽपि सुरेशोऽभूच्छचीपतिः । एवं हि सकला देवाः सर्वसिद्धिश्वराः प्रिये ॥ विनियोग:- ॐ श्री जगन्मङ्गलस्यास्य कवचस्य ऋषिः शिवः । छ्न्दोऽनुष्टुप् देवता च कालिका दक्षिणेरिता ॥ जगतां मोहने दुष्ट विजये भुक्तिमुक्तिषु । योषिदाकर्षणे चैव विनियोगः प्रकीर्तितः ॥ ऋष्यादि-न्यास:- श्री शिव ऋषये नमःशि...

कुलदेवी एवं कुलदेवता आकर्षण मंत्र

ॐ नमो कामद काली कामक्षा देवी तेरे सुमरे बेडा पार, पढि पढि मारुं गिन गिन फूल, जाहि बुलाई सोई आये, हांक मार हनुमान वीर पकड ला जल्दी, दुहाई तोय सीता सती, अंजनी माता की, मेरा मंत्र सांचा पिण्ड काचा, फुरो मंत्र ईश्वरो वाचा, इस मंत्र का ५१ दिन तक जाप होता है बाबा लंगोटी वाले के मंदिर मे बाबा के सभी यम नियम का पालन होता है ५१ दिन पूरे होने पर 41 वे दिन दशांश हवन एव विशेष पुजा होती है जिसमें आपको कोई आदमी दिखाई दे सकता है ओर कोई ध्वनि भी सुनाई दे सकती है या स्वप्न भी आ सकता है 41 दिन मंत्र जप करने के बाद आप इसका प्रयोग किसी ओर के लिये भी कर सकते है किसी का दोष जानने के लिये.. मेल करें 

संतान प्राप्ति का वरुण मंत्र......

  प्रणाम। इसे सर्वप्रथम महाराजा हरिश्चन्द्र ने सिद्ध किया था। गुरु वशिष्ठ ने यह गुरु मंत्र राजा हरिश्चन्द्र को दिया था। निसंतान हरिश्चन्द्र ने इस मंत्र के जप से पुत्र की प्राप्ति की थी। अनपतयोअस्मि देवेशः पुत्र देहि सुख प्रदम । ऋणत्रय पहारार्थमुद्धमोअयमयाकृत ।। इसका नित्य 108 बार जप करने से संतान अवश्य प्राप्त होती है। आप इस मंत्र से अभिमंत्रित यंत्र हमारे संस्थान से प्राप्त कर सकते है। जिसे बैडरूम में रखने व नित्य दर्शन करने से भी संतान प्राप्त होती हैं।